श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.14.19

नवम स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

राजोवाच

स्वागतं ते वरारोहे आस्यतां करवाम किम्।

संरमस्व मया साकं रतिर्नौ शाश्‍वतीः समाः॥ १९

svāgataṃ te varārohe āsyatāṃ karavāma kim|

saṃramasva mayā sākaṃ ratirnau śāśvatīḥ samāḥ|| 19

अर्थ

राजा पुरूरवाने कहा—सुन्दरी! तुम्हारा स्वागत है। बैठो, मैं तुम्हारी क्या सेवा करूँ? तुम मेरे साथ विहार करो और हम दोनोंका यह विहार अनन्त कालतक चलता रहे॥ १९॥

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