एक बार गलेमें वैजयन्ती माला पहने सहस्रबाहु अर्जुन बहुत-सी सुन्दरी स्त्रियोंके साथ नर्मदा नदीमें जल-विहार कर रहा था। उस समय मदोन्मत्त सहस्रबाहुने अपनी बाँहोंसे नदीका प्रवाह रोक दिया॥ २०॥
स्त्रीरत्नैरावृतः क्रीडन् रेवाम्भसि मदोत्कटः।
वैजयन्तीं स्रजं बिभ्रद् रुरोध सरितं भुजैः॥ २०
एक बार गलेमें वैजयन्ती माला पहने सहस्रबाहु अर्जुन बहुत-सी सुन्दरी स्त्रियोंके साथ नर्मदा नदीमें जल-विहार कर रहा था। उस समय मदोन्मत्त सहस्रबाहुने अपनी बाँहोंसे नदीका प्रवाह रोक दिया॥ २०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.15.20 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 77) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/15/20/