श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.15.21

नवम स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

विप्लावितं स्वशिबिरं प्रतिस्रोतःसरिज्जलैः।

नामृष्यत् तस्य तद् वीर्यं वीरमानी दशाननः॥ २१

viplāvitaṃ svaśibiraṃ pratisrotaḥsarijjalaiḥ|

nāmṛṣyat tasya tad vīryaṃ vīramānī daśānanaḥ|| 21

अर्थ

दशमुख रावणका शिविर भी वहीं कहीं पासमें ही था। नदीकी धारा उलटी बहने लगी, जिससे उसका शिविर डूबने लगा। रावण अपनेको बहुत बड़ा वीर तो मानता ही था, इसलिये सहस्रार्जुनका यह पराक्रम उससे सहन नहीं हुआ॥ २१॥

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