श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.15.6

नवम स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

एकतः श्यामकर्णानां हयानां चन्द्रवर्चसाम्।

सहस्रं दीयतां शुल्कं कन्यायाः कुशिका वयम्॥ ६

ekataḥ śyāmakarṇānāṃ hayānāṃ candravarcasām|

sahasraṃ dīyatāṃ śulkaṃ kanyāyāḥ kuśikā vayam|| 6

अर्थ

‘मुनिवर! हमलोग कुशिकवंशके हैं। हमारी कन्या मिलनी कठिन है। इसलिये आप एक हजार ऐसे घोड़े लाकर मुझे शुल्करूपमें दीजिये, जिनका सारा शरीर तो श्‍वेत हो, परन्तु एक-एक कान श्याम वर्णका हो’॥ ६॥

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