श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.15.7

नवम स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

इत्युक्तस्तन्मतं ज्ञात्वा गतः स वरुणान्तिकम्।

आनीय दत्त्वा तानश्‍वानुपयेमे वराननाम्॥ ७

ityuktastanmataṃ jñātvā gataḥ sa varuṇāntikam|

ānīya dattvā tānaśvānupayeme varānanām|| 7

अर्थ

जब गाधिने यह बात कही, तब ऋचीक मुनि उनका आशय समझ गये और वरुणके पास जाकर वैसे ही घोड़े ले आये तथा उन्हें देकर सुन्दरी सत्यवतीसे विवाह कर लिया॥ ७॥✎ 879

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #879 शब्दोंके बीचका स्थान: कियाथा—फिर → किया था—फिर

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