श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.16.1

नवम स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

अथ षोडशोऽध्यायः

परशुरामजीके द्वारा क्षत्रियसंहार और विश्‍वामित्रजीके वंशकी कथा

श्रीशुक उवाच

पित्रोपशिक्षितो रामस्तथेति कुरुनन्दन।

संवत्सरं तीर्थयात्रां चरित्वाऽऽश्रममाव्रजत्॥ १

pitropaśikṣito rāmastatheti kurunandana|

saṃvatsaraṃ tīrthayātrāṃ caritvā''śramamāvrajat|| 1

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! अपने पिताकी यह शिक्षा भगवान् परशुरामने ‘जो आज्ञा’ कहकर स्वीकार की। इसके बाद वे एक वर्षतक तीर्थयात्रा करके अपने आश्रमपर लौट आये॥ १॥

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