श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.16.2

नवम स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

कदाचिद् रेणुका याता गंगायां पद्ममालिनम्।

गन्धर्वराजं क्रीडन्तमप्सरोभिरपश्यत॥ २

kadācid reṇukā yātā gaṃgāyāṃ padmamālinam|

gandharvarājaṃ krīḍantamapsarobhirapaśyata|| 2

अर्थ

एक दिनकी बात है, परशुरामजीकी माता रेणुका गंगातटपर गयी हुई थीं। वहाँ उन्होंने देखा कि गन्धर्वराज चित्ररथ कमलोंकी माला पहने अप्सराओंके साथ विहार कर रहा है॥ २॥

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