॥ श्रीहरिः ॥
जामदग्न्योऽपि भगवान् रामः कमललोचनः।
आगामिन्यन्तरे राजन् वर्तयिष्यति वै बृहत्॥ २५
jāmadagnyo'pi bhagavān rāmaḥ kamalalocanaḥ|
āgāminyantare rājan vartayiṣyati vai bṛhat|| 25
अर्थ
परीक्षित्! कमललोचन जमदग्निनन्दन भगवान् परशुराम आगामी मन्वन्तरमें सप्तर्षियोंके मण्डलमें रहकर वेदोंका विस्तार करेंगे॥ २५॥
जामदग्न्योऽपि भगवान् रामः कमललोचनः।
आगामिन्यन्तरे राजन् वर्तयिष्यति वै बृहत्॥ २५
परीक्षित्! कमललोचन जमदग्निनन्दन भगवान् परशुराम आगामी मन्वन्तरमें सप्तर्षियोंके मण्डलमें रहकर वेदोंका विस्तार करेंगे॥ २५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.16.25 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 82) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/16/25/