धर्मसारथिके पुत्र थे शान्तरय। शान्तरय आत्मज्ञानी होनेके कारण कृतकृत्य थे, उन्हें सन्तानकी आवश्यकता न थी। परीक्षित्! आयुके पुत्र रजिके अत्यन्त तेजस्वी पाँच सौ पुत्र थे॥ १२॥
ततः शान्तरयो जज्ञे कृतकृत्यः स आत्मवान्।
रजेः पंचशतान्यासन् पुत्राणाममितौजसाम्॥ १२
धर्मसारथिके पुत्र थे शान्तरय। शान्तरय आत्मज्ञानी होनेके कारण कृतकृत्य थे, उन्हें सन्तानकी आवश्यकता न थी। परीक्षित्! आयुके पुत्र रजिके अत्यन्त तेजस्वी पाँच सौ पुत्र थे॥ १२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.17.12 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 85) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/17/12/