श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.17.12

नवम स्कन्ध · अध्याय 17 · अथ सप्तदशोऽध्यायः

ततः शान्तरयो जज्ञे कृतकृत्यः स आत्मवान्।

रजेः पंचशतान्यासन् पुत्राणाममितौजसाम्॥ १२

tataḥ śāntarayo jajñe kṛtakṛtyaḥ sa ātmavān|

rajeḥ paṃcaśatānyāsan putrāṇāmamitaujasām|| 12

अर्थ

धर्मसारथिके पुत्र थे शान्तरय। शान्तरय आत्मज्ञानी होनेके कारण कृतकृत्य थे, उन्हें सन्तानकी आवश्यकता न थी। परीक्षित्! आयुके पुत्र रजिके अत्यन्त तेजस्वी पाँच सौ पुत्र थे॥ १२॥

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