श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.18.34

नवम स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

गर्भसम्भवमासुर्या भर्तुर्विज्ञाय मानिनी।

देवयानी पितुर्गेहं ययौ क्रोधविमूर्च्छिता॥ ३४

garbhasambhavamāsuryā bharturvijñāya māninī|

devayānī piturgehaṃ yayau krodhavimūrcchitā|| 34

अर्थ

जब मानिनी देवयानीको यह मालूम हुआ कि शर्मिष्ठाको भी मेरे पतिके द्वारा ही गर्भ रहा था, तब वह क्रोधसे बेसुध होकर अपने पिताके घर चली गयी॥ ३४॥

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