श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.18.33

नवम स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

यदुं च तुर्वसुं चैव देवयानी व्यजायत।

द्रुह्युं चानुं च पूरुं च शर्मिष्ठा वार्षपर्वणी॥ ३३

yaduṃ ca turvasuṃ caiva devayānī vyajāyata|

druhyuṃ cānuṃ ca pūruṃ ca śarmiṣṭhā vārṣaparvaṇī|| 33

अर्थ

देवयानीके दो पुत्र हुए—यदु और तुर्वसु। तथा वृषपर्वाकी पुत्री शर्मिष्ठाके तीन पुत्र हुए—द्रुह्यु, अनु और पूरु॥ ३३॥

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