श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.18.4

नवम स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

चतसृष्वादिशद् दिक्षु भ्रातॄन् भ्राता यवीयसः।

कृतदारो जुगोपोर्वीं काव्यस्य वृषपर्वणः॥ ४

catasṛṣvādiśad dikṣu bhrātṝn bhrātā yavīyasaḥ|

kṛtadāro jugoporvīṃ kāvyasya vṛṣaparvaṇaḥ|| 4

अर्थ

ययातिने अपने चार छोटे भाइयोंको चार दिशाओंमें नियुक्त कर दिया और स्वयं शुक्राचार्यकी पुत्री देवयानी और दैत्यराज वृषपर्वाकी पुत्री शर्मिष्ठाको पत्‍नीके रूपमें स्वीकार करके पृथ्वीकी रक्षा करने लगा॥ ४॥

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