श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.18.41

नवम स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

तुर्वसुश्‍चोदितः पित्रा द्रुह्युश्‍चानुश्‍च भारत।

प्रत्याचख्युरधर्मज्ञा ह्यनित्ये नित्यबुद्धयः॥ ४१

turvasuścoditaḥ pitrā druhyuścānuśca bhārata|

pratyācakhyuradharmajñā hyanitye nityabuddhayaḥ|| 41

अर्थ

परीक्षित्! इसी प्रकार तुर्वसु, द्रुह्यु और अनुने भी पिताकी आज्ञा अस्वीकार कर दी। सच पूछो तो उन पुत्रोंको धर्मका तत्त्व मालूम नहीं था। वे इस अनित्य शरीरको ही नित्य माने बैठे थे॥ ४१॥

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