श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.18.42

नवम स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

अपृच्छत् तनयं पूरुं वयसोनं गुणाधिकम्।

न त्वमग्रजवद् वत्स मां प्रत्याख्यातुमर्हसि॥ ४२

apṛcchat tanayaṃ pūruṃ vayasonaṃ guṇādhikam|

na tvamagrajavad vatsa māṃ pratyākhyātumarhasi|| 42

अर्थ

अब ययातिने अवस्थामें सबसे छोटे किन्तु गुणोंमें बड़े अपने पुत्र पूरुको बुलाकर पूछा और कहा—‘बेटा! अपने बड़े भाइयोंके समान तुम्हें तो मेरी बात नहीं टालनी चाहिये’॥ ४२॥

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