परीक्षित्! ययातिने अपनी पत्नीसे इस प्रकार कहकर पूरुकी जवानी उसे लौटा दी और उससे अपना बुढ़ापा ले लिया। यह इसलिये कि अब उनके चित्तमें विषयोंकी वासना नहीं रह गयी थी॥ २१॥
इत्युक्त्वा नाहुषो जायां तदीयं पूरवे वयः।
दत्त्वा स्वां जरसं तस्मादाददे विगतस्पृहः॥ २१
परीक्षित्! ययातिने अपनी पत्नीसे इस प्रकार कहकर पूरुकी जवानी उसे लौटा दी और उससे अपना बुढ़ापा ले लिया। यह इसलिये कि अब उनके चित्तमें विषयोंकी वासना नहीं रह गयी थी॥ २१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.19.21 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 94) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/19/21/