॥ श्रीहरिः ॥
दिशि दक्षिणपूर्वस्यां द्रुह्युं दक्षिणतो यदुम्।
प्रतीच्यां तुर्वसुं चक्र उदीच्यामनुमीश्वरम्॥ २२
diśi dakṣiṇapūrvasyāṃ druhyuṃ dakṣiṇato yadum|
pratīcyāṃ turvasuṃ cakra udīcyāmanumīśvaram|| 22
अर्थ
इसके बाद उन्होंने दक्षिण-पूर्व दिशामें द्रुह्यु, दक्षिणमें यदु, पश्चिममें तुर्वसु और उत्तरमें अनुको राज्य दे दिया॥ २२॥
दिशि दक्षिणपूर्वस्यां द्रुह्युं दक्षिणतो यदुम्।
प्रतीच्यां तुर्वसुं चक्र उदीच्यामनुमीश्वरम्॥ २२
इसके बाद उन्होंने दक्षिण-पूर्व दिशामें द्रुह्यु, दक्षिणमें यदु, पश्चिममें तुर्वसु और उत्तरमें अनुको राज्य दे दिया॥ २२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.19.22 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 94) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/19/22/