श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.19.4

नवम स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

तस्या उद्धरणोपायं बस्तः कामी विचिन्तयन्।

व्यधत्त तीर्थमुद‍्धृत्य विषाणाग्रेण रोधसी॥ ४

tasyā uddharaṇopāyaṃ bastaḥ kāmī vicintayan|

vyadhatta tīrthamuddhṛtya viṣāṇāgreṇa rodhasī|| 4

अर्थ

वह बकरा बड़ा कामी था। वह सोचने लगा कि इस बकरीको किस प्रकार कूएँसे निकाला जाय। उसने अपने सींगसे कूएँके पासकी धरती खोद डाली और रास्ता तैयार कर लिया॥ ४॥✎ 1644

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1644 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: ग्राम-वासी → ग्रामवासी

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