एक दिन रातमें वर्षा हो रही थी। उस समय गायोंके झुंडमें एक बाघ घुस आया। उससे डरकर सोयी हुई गौएँ उठ खड़ी हुईं। वे गोशालामें ही इधर-उधर भागने लगीं॥ ४॥
एकदा प्राविशद् गोष्ठं शार्दूलो निशि वर्षति।
शयाना गाव उत्थाय भीतास्ता बभ्रमुर्व्रजे॥ ४
एक दिन रातमें वर्षा हो रही थी। उस समय गायोंके झुंडमें एक बाघ घुस आया। उससे डरकर सोयी हुई गौएँ उठ खड़ी हुईं। वे गोशालामें ही इधर-उधर भागने लगीं॥ ४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.2.4 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 11) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/2/4/