॥ श्रीहरिः ॥
एकां जग्राह बलवान् सा चुक्रोश भयातुरा।
तस्यास्तत् क्रन्दितं श्रुत्वा पृषध्रोऽभिससार ह॥ ५
ekāṃ jagrāha balavān sā cukrośa bhayāturā|
tasyāstat kranditaṃ śrutvā pṛṣadhro'bhisasāra ha|| 5
अर्थ
बलवान् बाघने एक गायको पकड़ लिया। वह अत्यन्त भयभीत होकर चिल्लाने लगी। उसका वह क्रन्दन सुनकर पृषध्र गायके पास दौड़ आया॥ ५॥
एकां जग्राह बलवान् सा चुक्रोश भयातुरा।
तस्यास्तत् क्रन्दितं श्रुत्वा पृषध्रोऽभिससार ह॥ ५
बलवान् बाघने एक गायको पकड़ लिया। वह अत्यन्त भयभीत होकर चिल्लाने लगी। उसका वह क्रन्दन सुनकर पृषध्र गायके पास दौड़ आया॥ ५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.2.5 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 11) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/2/5/