श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.20.12

नवम स्कन्ध · अध्याय 20 · अथ विंशोऽध्यायः

व्यक्तं राजन्यतनयां वेद‍्म्यहं त्वां सुमध्यमे।

न हि चेतः पौरवाणामधर्मे रमते क्‍वचित्॥ १२

vyaktaṃ rājanyatanayāṃ vedmyahaṃ tvāṃ sumadhyame|

na hi cetaḥ pauravāṇāmadharme ramate kvacit|| 12

अर्थ

सुन्दरी! मैं स्पष्ट समझ रहा हूँ कि तुम किसी क्षत्रियकी कन्या हो। क्योंकि पुरुवंशियोंका चित्त कभी अधर्मकी ओर नहीं झुकता’॥ १२॥✎ 1646

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1646 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: जग-मगा → जगमगा

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