सुन्दरी! मैं स्पष्ट समझ रहा हूँ कि तुम किसी क्षत्रियकी कन्या हो। क्योंकि पुरुवंशियोंका चित्त कभी अधर्मकी ओर नहीं झुकता’॥ १२॥✎ 1646
व्यक्तं राजन्यतनयां वेद्म्यहं त्वां सुमध्यमे।
न हि चेतः पौरवाणामधर्मे रमते क्वचित्॥ १२
सुन्दरी! मैं स्पष्ट समझ रहा हूँ कि तुम किसी क्षत्रियकी कन्या हो। क्योंकि पुरुवंशियोंका चित्त कभी अधर्मकी ओर नहीं झुकता’॥ १२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.20.12 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 96) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/20/12/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)