श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.20.13

नवम स्कन्ध · अध्याय 20 · अथ विंशोऽध्यायः

शकुन्तलोवाच

विश्‍वामित्रात्मजैवाहं त्यक्ता मेनकया वने।

वेदैतद् भगवान् कण्वो वीर किं करवाम ते॥ १३

viśvāmitrātmajaivāhaṃ tyaktā menakayā vane|

vedaitad bhagavān kaṇvo vīra kiṃ karavāma te|| 13

अर्थ

शकुन्तलाने कहा—‘आपका कहना सत्य है। मैं विश्‍वामित्रजीकी पुत्री हूँ। मेनका अप्सराने मुझे वनमें छोड़ दिया था। इस बातके साक्षी हैं मेरा पालन-पोषण करनेवाले महर्षि कण्व। वीरशिरोमणे! मैं आपकी क्या सेवा करूँ?॥ १३॥

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