श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.20.34

नवम स्कन्ध · अध्याय 20 · अथ विंशोऽध्यायः

तस्यासन् नृप वैदर्भ्यः पत्‍न्यस्तिस्रः सुसम्मताः।

जघ्नुस्त्यागभयात् पुत्रान् नानुरूपा इतीरिते॥ ३४

tasyāsan nṛpa vaidarbhyaḥ patnyastisraḥ susammatāḥ|

jaghnustyāgabhayāt putrān nānurūpā itīrite|| 34

अर्थ

परीक्षित्! विदर्भराजकी तीन कन्याएँ सम्राट् भरतकी पत्‍नियाँ थीं। वे उनका बड़ा आदर भी करते थे। परन्तु जब भरतने उनसे कह दिया कि तुम्हारे पुत्र मेरे अनुरूप नहीं हैं, तब वे डर गयीं कि कहीं सम्राट् हमें त्याग न दें। इसलिये उन्होंने अपने बच्चोंको मार डाला॥ ३४॥✎ 1648

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1648 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: मरुद्-गणोंने → मरुद्गणोंने

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