रन्तिदेवके अनुयायी भी उनके संगके प्रभावसे योगी हो गये और सब भगवान्के ही आश्रित परम भक्त बन गये॥ १८॥✎ 881
तत्प्रसंगानुभावेन रन्तिदेवानुवर्तिनः।
अभवन् योगिनः सर्वे नारायणपरायणाः॥ १८
रन्तिदेवके अनुयायी भी उनके संगके प्रभावसे योगी हो गये और सब भगवान्के ही आश्रित परम भक्त बन गये॥ १८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.21.18 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 102) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/21/18/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)