श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.21.24

नवम स्कन्ध · अध्याय 21 · अथैकविंशोऽध्यायः

रुचिराश्‍वसुतः पारः पृथुसेनस्तदात्मजः।

पारस्य तनयो नीपस्तस्य पुत्रशतं त्वभूत्॥ २४

rucirāśvasutaḥ pāraḥ pṛthusenastadātmajaḥ|

pārasya tanayo nīpastasya putraśataṃ tvabhūt|| 24

अर्थ

रुचिराश्‍वका पुत्र पार था और पारका पृथुसेन। पारके दूसरे पुत्रका नाम नीप था। उसके सौ पुत्र थे॥ २४॥

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