sa yogī gavi bhāryāyāṃ viṣvaksenamadhāt sutam|| 25
अर्थ
इसी नीपने (छाया)* शुककी कन्या कृत्वीसे विवाह किया था। उससे ब्रह्मदत्त नामक पुत्र उत्पन्न हुआ। ब्रह्मदत्त बड़ा योगी था। उसने अपनी पत्नी सरस्वतीके गर्भसे विष्वक्सेन नामक पुत्र उत्पन्न किया॥ २५॥
स कृत्व्यां शुककन्यायां ब्रह्मदत्तमजीजनत्।
स योगी गवि भार्यायां विष्वक्सेनमधात् सुतम्॥ २५
इसी नीपने (छाया) शुककी कन्या कृत्वीसे विवाह किया था। उससे ब्रह्मदत्त नामक पुत्र उत्पन्न हुआ। ब्रह्मदत्त बड़ा योगी था। उसने अपनी पत्नी सरस्वतीके गर्भसे विष्वक्सेन नामक पुत्र उत्पन्न किया॥ २५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.21.25 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 102) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/21/25/
टिप्पणियाँ
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श्रीशुकदेवजी असंग थे पर वे वन जाते समय एक छाया शुक रचकर छोड़ गये थे। उस छाया शुकने ही गृहस्थोचित व्यवहार किये थे।