श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.21.6

नवम स्कन्ध · अध्याय 21 · अथैकविंशोऽध्यायः

तस्मै संव्यभजत् सोऽन्‍नमादृत्य श्रद्धयान्वितः।

हरिं सर्वत्र संपश्यन् स भुक्त्वा प्रययौ द्विजः॥ ६

tasmai saṃvyabhajat so'nnamādṛtya śraddhayānvitaḥ|

hariṃ sarvatra saṃpaśyan sa bhuktvā prayayau dvijaḥ|| 6

अर्थ

रन्तिदेव सबमें श्रीभगवान्‌के ही दर्शन करते थे। अतएव उन्होंने बड़ी श्रद्धासे आदरपूर्वक उसी अन्‍नमेंसे ब्राह्मणको भोजन कराया। ब्राह्मणदेवता भोजन करके चले गये॥ ६॥

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