धृष्टद्युम्नका पुत्र था धृष्टकेतु। भर्म्याश्वके वंशमें उत्पन्न हुए ये नरपति ‘पांचाल’ कहलाये। अजमीढका दूसरा पुत्र था ऋक्ष। उनके पुत्र हुए संवरण॥ ३॥
धृष्टद्युम्नाद् धृष्टकेतुर्भार्म्याः पंचालका इमे।
योऽजमीढसुतो ह्यन्य ऋक्षः संवरणस्ततः॥ ३
धृष्टद्युम्नका पुत्र था धृष्टकेतु। भर्म्याश्वके वंशमें उत्पन्न हुए ये नरपति ‘पांचाल’ कहलाये। अजमीढका दूसरा पुत्र था ऋक्ष। उनके पुत्र हुए संवरण॥ ३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.22.3 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 104) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/22/3/