श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.23.19

नवम स्कन्ध · अध्याय 23 · अथ त्रयोविंशोऽध्यायः

वर्णयामि महापुण्यं सर्वपापहरं नृणाम्।

यदोर्वंशं नरः श्रुत्वा सर्वपापैः प्रमुच्यते॥ १९

varṇayāmi mahāpuṇyaṃ sarvapāpaharaṃ nṛṇām|

yadorvaṃśaṃ naraḥ śrutvā sarvapāpaiḥ pramucyate|| 19

अर्थ

परीक्षित्! महाराज यदुका वंश परम पवित्र और मनुष्योंके समस्त पापोंको नष्ट करनेवाला है। जो मनुष्य इसका श्रवण करेगा, वह समस्त पापोंसे मुक्त हो जायगा॥ १९॥

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