वैद्यशिरोमणि अश्विनीकुमारोंने महर्षि च्यवनका अभिनन्दन करके कहा, ‘ठीक है।’ और इसके बाद उनसे कहा कि ‘यह सिद्धोंके द्वारा बनाया हुआ कुण्ड है, आप इसमें स्नान कीजिये’॥ १३॥
बाढमित्यूचतुर्विप्रमभिनन्द्य भिषक्तमौ।
निमज्जतां भवानस्मिन् ह्रदे सिद्धविनिर्मिते॥ १३
वैद्यशिरोमणि अश्विनीकुमारोंने महर्षि च्यवनका अभिनन्दन करके कहा, ‘ठीक है।’ और इसके बाद उनसे कहा कि ‘यह सिद्धोंके द्वारा बनाया हुआ कुण्ड है, आप इसमें स्नान कीजिये’॥ १३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.3.13 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 16) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/3/13/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)