श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.3.14

नवम स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

इत्युक्त्वा जरया ग्रस्तदेहो धमनिसन्ततः।

ह्रदं प्रवेशितोऽश्‍विभ्यां वलीपलितविप्रियः॥ १४✎ 1127

ityuktvā jarayā grastadeho dhamanisantataḥ|

hradaṃ praveśito'śvibhyāṃ valīpalitavipriyaḥ|| 14

अर्थ

च्यवन मुनिके शरीरको बुढ़ापेने घेर रखा था। सब ओर नसें दीख रही थीं, झुर्रियाँ पड़ जाने एवं बाल पक जानेके कारण वे देखनेमें बहुत भद्दे लगते थे। अश्‍विनीकुमारोंने उन्हें अपने साथ लेकर कुण्डमें प्रवेश किया॥ १४॥

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1127 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): हृदं → ह्रदं

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