च्यवन मुनिके शरीरको बुढ़ापेने घेर रखा था। सब ओर नसें दीख रही थीं, झुर्रियाँ पड़ जाने एवं बाल पक जानेके कारण वे देखनेमें बहुत भद्दे लगते थे। अश्विनीकुमारोंने उन्हें अपने साथ लेकर कुण्डमें प्रवेश किया॥ १४॥
इत्युक्त्वा जरया ग्रस्तदेहो धमनिसन्ततः।
ह्रदं प्रवेशितोऽश्विभ्यां वलीपलितविप्रियः॥ १४
च्यवन मुनिके शरीरको बुढ़ापेने घेर रखा था। सब ओर नसें दीख रही थीं, झुर्रियाँ पड़ जाने एवं बाल पक जानेके कारण वे देखनेमें बहुत भद्दे लगते थे। अश्विनीकुमारोंने उन्हें अपने साथ लेकर कुण्डमें प्रवेश किया॥ १४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.3.14 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 16) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/3/14/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)