राजा शर्यातिके इस प्रकार कहनेपर पवित्र मुसकानवाली सुकन्याने मुसकराकर कहा—‘पिताजी! ये आपके जामाता स्वयं भृगुनन्दन महर्षि च्यवन ही हैं’॥ २२॥
एवं ब्रुवाणं पितरं स्मयमाना शुचिस्मिता।
उवाच तात जामाता तवैष भृगुनन्दनः॥ २२
राजा शर्यातिके इस प्रकार कहनेपर पवित्र मुसकानवाली सुकन्याने मुसकराकर कहा—‘पिताजी! ये आपके जामाता स्वयं भृगुनन्दन महर्षि च्यवन ही हैं’॥ २२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.3.22 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 17) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/3/22/