श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.3.23

नवम स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

शशंस पित्रे तत् सर्वं वयोरूपाभिलम्भनम्।

विस्मितः परमप्रीतस्तनयां परिषस्वजे॥ २३

śaśaṃsa pitre tat sarvaṃ vayorūpābhilambhanam|

vismitaḥ paramaprītastanayāṃ pariṣasvaje|| 23

अर्थ

इसके बाद उसने अपने पितासे महर्षि च्यवनके यौवन और सौन्दर्यकी प्राप्तिका सारा वृत्तान्त कह सुनाया। वह सब सुनकर राजा शर्याति अत्यन्त विस्मित हुए। उन्होंने बड़े प्रेमसे अपनी पुत्रीको गलेसे लगा लिया॥ २३॥

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