श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.3.24

नवम स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

सोमेन याजयन् वीरं ग्रहं सोमस्य चाग्रहीत्।

असोमपोरप्यश्‍विनोश्‍च्यवनः स्वेन तेजसा॥ २४

somena yājayan vīraṃ grahaṃ somasya cāgrahīt|

asomaporapyaśvinoścyavanaḥ svena tejasā|| 24

अर्थ

महर्षि च्यवनने वीर शर्यातिसे सोमयज्ञका अनुष्ठान करवाया और सोमपानके अधिकारी न होनेपर भी अपने प्रभावसे अश्‍विनीकुमारोंको सोमपान कराया॥ २४॥✎ 1632

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1632 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: चिढ़-कर → चिढ़कर

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