श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.3.4

नवम स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

ते दैवचोदिता बाला ज्योतिषी कण्टकेन वै।

अविध्यन्मुग्धभावेन सुस्रावासृक् ततो बहु॥ ४

te daivacoditā bālā jyotiṣī kaṇṭakena vai|

avidhyanmugdhabhāvena susrāvāsṛk tato bahu|| 4

अर्थ

दैवकी कुछ ऐसी ही प्रेरणा थी, सुकन्याने बालसुलभ चपलतासे एक काँटेके द्वारा उन ज्योतियोंको बेध दिया। इससे उनमेंसे बहुत-सा खून बह चला॥ ४॥✎ 1631

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1631 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: तुम-लोगोंने → तुमलोगोंने

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