श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.3.5

नवम स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

शकृन्मूत्रनिरोधोऽभूत् सैनिकानां च तत्क्षणात्।

राजर्षिस्तमुपालक्ष्य पुरुषान् विस्मितोऽब्रवीत्॥ ५

śakṛnmūtranirodho'bhūt sainikānāṃ ca tatkṣaṇāt|

rājarṣistamupālakṣya puruṣān vismito'bravīt|| 5

अर्थ

उसी समय राजा शर्यातिके सैनिकोंका मल-मूत्र रुक गया। राजर्षि शर्यातिको यह देखकर बड़ा आश्‍चर्य हुआ, उन्होंने अपने सैनिकोंसे कहा॥ ५॥✎ 1631

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1631 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: तुम-लोगोंने → तुमलोगोंने

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