श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.3.8

नवम स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

दुहितुस्तद् वचः श्रुत्वा शर्यातिर्जातसाध्वसः।

मुनिं प्रसादयामास वल्मीकान्तर्हितं शनैः॥ ८

duhitustad vacaḥ śrutvā śaryātirjātasādhvasaḥ|

muniṃ prasādayāmāsa valmīkāntarhitaṃ śanaiḥ|| 8

अर्थ

अपनी कन्याकी यह बात सुनकर शर्याति घबरा गये। उन्होंने धीरे-धीरे स्तुति करके बाँबीमें छिपे हुए च्यवन मुनिको प्रसन्‍न किया॥ ८॥✎ 1631

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1631 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: तुम-लोगोंने → तुमलोगोंने

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