श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.4.19

नवम स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

मुकुन्दलिंगालयदर्शने दृशौ

तद‍्भृत्यगात्रस्पर्शेऽङ्गसंगमम् ।

घ्राणं च तत्पादसरोजसौरभे

श्रीमत्तुलस्या रसनां तदर्पिते॥ १९

mukundaliṃgālayadarśane dṛśau

tadbhṛtyagātrasparśe'ṅgasaṃgamam |

ghrāṇaṃ ca tatpādasarojasaurabhe

śrīmattulasyā rasanāṃ tadarpite|| 19

अर्थ

उन्होंने अपने नेत्र मुकुन्दमूर्ति एवं मन्दिरोंके दर्शनोंमें, अंग-संग भगवद्भक्तोंके शरीरस्पर्शमें, नासिका उनके चरणकमलोंपर चढ़ी श्रीमती तुलसीके दिव्य गन्धमें और रसना (जिह्वा)-को भगवान्‌के प्रति अर्पित नैवेद्य-प्रसादमें संल‌ग्‍न कर दिया था॥ १९॥

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