श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.4.24

नवम स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

स्वर्गो न प्रार्थितो यस्य मनुजैरमरप्रियः।

शृण्वद्भिरुपगायद्भिरुत्तमश्‍लोकचेष्टितम्॥ २४

svargo na prārthito yasya manujairamarapriyaḥ|

śṛṇvadbhirupagāyadbhiruttamaślokaceṣṭitam|| 24

अर्थ

उनकी प्रजा महात्माओंके द्वारा गाये हुए भगवान्‌के उत्तम चरित्रोंका किसी समय बड़े प्रेमसे श्रवण करती और किसी समय उनका गान करती। इस प्रकार उनके राज्यके मनुष्य देवताओंके अत्यन्त प्यारे स्वर्गकी भी इच्छा नहीं करते॥ २४॥

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