श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.4.28

नवम स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

तस्मा अदाद्धरिश्‍चक्रं प्रत्यनीकभयावहम्।

एकान्तभक्तिभावेन प्रीतो भृ२त्याभिरक्षणम्॥ २८

tasmā adāddhariścakraṃ pratyanīkabhayāvaham|

ekāntabhaktibhāvena prīto bhṛtyābhirakṣaṇam|| 28

अर्थ

उनकी अनन्य प्रेममयी भक्तिसे प्रसन्‍न होकर भगवान्‌ने उनकी रक्षाके लिये सुदर्शन चक्रको नियुक्त कर दिया था, जो विरोधियोंको भयभीत करनेवाला एवं भगवद्भक्तोंकी रक्षा करनेवाला है॥ २८॥

टिप्पणियाँ

  1. २

    भूताभि०।

    (मुद्रित पृष्ठ 22)

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