श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.4.29

नवम स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

आरिराधयिषुः३ कृष्णं महिष्या तुल्यशीलया।

युक्तः सांवत्सरं वीरो दधार द्वादशीव्रतम्॥ २९

ārirādhayiṣuḥ kṛṣṇaṃ mahiṣyā tulyaśīlayā|

yuktaḥ sāṃvatsaraṃ vīro dadhāra dvādaśīvratam|| 29

अर्थ

राजा अम्बरीषकी पत्‍नी भी उन्हींके समान धर्मशील, संसारसे विरक्त एवं भक्तिपरायण थीं। एक बार उन्होंने अपनी पत्‍नीके साथ भगवान् श्रीकृष्णकी आराधना करनेके लिये एक वर्षतक द्वादशीप्रधान एकादशी-व्रत करनेका नियम ग्रहण किया॥ २९॥✎ 1633

टिप्पणियाँ

  1. ३

    षुर्विष्णुं।

    (मुद्रित पृष्ठ 22)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1633 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: महा-भाग्यवान् → महाभाग्यवान्

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