॥ श्रीहरिः ॥
मुहूर्तार्धावशिष्टायां द्वादश्यां पारणं प्रति।
चिन्तयामास धर्मज्ञो द्विजैस्तद्धर्मसंकटे॥ ३८
muhūrtārdhāvaśiṣṭāyāṃ dvādaśyāṃ pāraṇaṃ prati|
cintayāmāsa dharmajño dvijaistaddharmasaṃkaṭe|| 38
अर्थ
इधर द्वादशी केवल घड़ीभर शेष रह गयी थी। धर्मज्ञ अम्बरीषने धर्म-संकटमें पड़कर ब्राह्मणोंके साथ परामर्श किया॥ ३८॥
मुहूर्तार्धावशिष्टायां द्वादश्यां पारणं प्रति।
चिन्तयामास धर्मज्ञो द्विजैस्तद्धर्मसंकटे॥ ३८
इधर द्वादशी केवल घड़ीभर शेष रह गयी थी। धर्मज्ञ अम्बरीषने धर्म-संकटमें पड़कर ब्राह्मणोंके साथ परामर्श किया॥ ३८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.4.38 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 23) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/4/38/