श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.4.39

नवम स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

ब्राह्मणातिक्रमे दोषो द्वादश्यां यदपारणे।

यत् कृत्वा साधु मे भूयादधर्मो वा न मां स्पृशेत्॥ ३९✎ 1875

brāhmaṇātikrame doṣo dvādaśyāṃ yadapāraṇe|

yat kṛtvā sādhu me bhūyādadharmo vā na māṃ spṛśet|| 39

अर्थ

उन्होंने कहा—‘ब्राह्मण-देवताओ! ब्राह्मणको बिना भोजन कराये स्वयं खा लेना और द्वादशी रहते पारण न करना—दोनों ही दोष हैं। इसलिये इस समय जैसा करनेसे मेरी भलाई हो और मुझे पाप न लगे, ऐसा काम करना चाहिये॥ ३९॥

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1875 अक्षर (एक स्थानपर, प्रमाणसहित): मांस्पृशेत् → मां स्पृशेत्

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