श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.4.40

नवम स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

अम्भसा केवलेनाथ करिष्ये व्रतपारणम्।

प्राहुरब्भक्षणं विप्रा ह्यशितं नाशितं च तत्॥ ४०

ambhasā kevalenātha kariṣye vratapāraṇam|

prāhurabbhakṣaṇaṃ viprā hyaśitaṃ nāśitaṃ ca tat|| 40

अर्थ

तब ब्राह्मणोंके साथ विचार करके उन्होंने कहा—‘ब्राह्मणो! श्रुतियोंमें ऐसा कहा गया है कि जल पी लेना भोजन करना भी है, नहीं भी करना है। इसलिये इस समय केवल जलसे पारण किये लेता हूँ॥ ४०॥

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