prāhurabbhakṣaṇaṃ viprā hyaśitaṃ nāśitaṃ ca tat|| 40
अर्थ
तब ब्राह्मणोंके साथ विचार करके उन्होंने कहा—‘ब्राह्मणो! श्रुतियोंमें ऐसा कहा गया है कि जल पी लेना भोजन करना भी है, नहीं भी करना है। इसलिये इस समय केवल जलसे पारण किये लेता हूँ॥ ४०॥
अम्भसा केवलेनाथ करिष्ये व्रतपारणम्।
प्राहुरब्भक्षणं विप्रा ह्यशितं नाशितं च तत्॥ ४०
तब ब्राह्मणोंके साथ विचार करके उन्होंने कहा—‘ब्राह्मणो! श्रुतियोंमें ऐसा कहा गया है कि जल पी लेना भोजन करना भी है, नहीं भी करना है। इसलिये इस समय केवल जलसे पारण किये लेता हूँ॥ ४०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.4.40 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 23) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/4/40/