श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.4.42

नवम स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

दुर्वासा यमुनाकूलात् कृतावश्यक आगतः।

राज्ञाभिनन्दितस्तस्य बुबुधे चेष्टितं धिया॥ ४२

durvāsā yamunākūlāt kṛtāvaśyaka āgataḥ|

rājñābhinanditastasya bubudhe ceṣṭitaṃ dhiyā|| 42

अर्थ

दुर्वासाजी आवश्यक कर्मोंसे निवृत्त होकर यमुनातटसे लौट आये। जब राजाने आगे बढ़कर उनका अभिनन्दन किया तब उन्होंने अनुमानसे ही समझ लिया कि राजाने पारण कर लिया है॥ ४२॥

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