उस समय दुर्वासाजी बहुत भूखे थे। इसलिये यह जानकर कि राजाने पारण कर लिया है, वे क्रोधसे थर-थर काँपने लगे। भौंहोंके चढ़ जानेसे उनका मुँह विकट हो गया। उन्होंने हाथ जोड़कर खड़े अम्बरीषसे डाँटकर कहा॥ ४३॥
मन्युना प्रचलद्गात्रो भ्रुकुटीकुटिलाननः।
बुभुक्षितश्च सुतरां कृतांजलिमभाषत॥ ४३
उस समय दुर्वासाजी बहुत भूखे थे। इसलिये यह जानकर कि राजाने पारण कर लिया है, वे क्रोधसे थर-थर काँपने लगे। भौंहोंके चढ़ जानेसे उनका मुँह विकट हो गया। उन्होंने हाथ जोड़कर खड़े अम्बरीषसे डाँटकर कहा॥ ४३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.4.43 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 24) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/4/43/