यों कहते-कहते वे क्रोधसे जल उठे। उन्होंने अपनी एक जटा उखाड़ी और उससे अम्बरीषको मार डालनेके लिये एक कृत्या उत्पन्न की। वह प्रलयकालकी आगके समान दहक रही थी॥ ४६॥
एवं ब्रुवाण उत्कृत्य जटां रोषविदीपितः।
तया स निर्ममे तस्मै कृत्यां कालानलोपमाम्॥ ४६
यों कहते-कहते वे क्रोधसे जल उठे। उन्होंने अपनी एक जटा उखाड़ी और उससे अम्बरीषको मार डालनेके लिये एक कृत्या उत्पन्न की। वह प्रलयकालकी आगके समान दहक रही थी॥ ४६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.4.46 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 24) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/4/46/