वह आगके समान जलती हुई, हाथमें तलवार लेकर राजा अम्बरीषपर टूट पड़ी। उस समय उसके पैरोंकी धमकसे पृथ्वी काँप रही थी। परन्तु राजा अम्बरीष उसे देखकर उससे तनिक भी विचलित नहीं हुए। वे एक पग भी नहीं हटे, ज्यों-के-त्यों खड़े रहे॥ ४७॥✎ 876
तामापतन्तीं ज्वलतीमसिहस्तां पदा भुवम्।
वेपयन्तीं समुद्वीक्ष्य न चचाल पदान्नृपः॥ ४७
वह आगके समान जलती हुई, हाथमें तलवार लेकर राजा अम्बरीषपर टूट पड़ी। उस समय उसके पैरोंकी धमकसे पृथ्वी काँप रही थी। परन्तु राजा अम्बरीष उसे देखकर उससे तनिक भी विचलित नहीं हुए। वे एक पग भी नहीं हटे, ज्यों-के-त्यों खड़े रहे॥ ४७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.4.47 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 24) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/4/47/