श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.5.19

नवम स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

सोऽशित्वाऽऽदृतमानीतमातिथ्यं सार्वकामिकम्।

तृप्तात्मा नृपतिं प्राह भुज्यतामिति सादरम्॥ १९

so'śitvā''dṛtamānītamātithyaṃ sārvakāmikam|

tṛptātmā nṛpatiṃ prāha bhujyatāmiti sādaram|| 19

अर्थ

राजा अम्बरीष बड़े आदरसे अतिथिके योग्य सब प्रकारकी भोजन-सामग्री ले आये। दुर्वासाजी भोजन करके तृप्त हो गये। अब उन्होंने आदरसे कहा—‘राजन्! अब आप भी भोजन कीजिये॥ १९॥

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