परीक्षित्! जब सुदर्शन चक्रसे भयभीत होकर दुर्वासाजी भगे थे, तबसे लेकर उनके लौटनेतक एक वर्षका समय बीत गया। इतने दिनोंतक राजा अम्बरीष उनके दर्शनकी आकांक्षासे केवल जल पीकर ही रहे॥ २३॥
संवत्सरोऽत्यगात् तावद् यावता नागतो गतः।
मुनिस्तद्दर्शनाकांक्षो राजाऽब्भक्षो बभूव ह॥ २३
परीक्षित्! जब सुदर्शन चक्रसे भयभीत होकर दुर्वासाजी भगे थे, तबसे लेकर उनके लौटनेतक एक वर्षका समय बीत गया। इतने दिनोंतक राजा अम्बरीष उनके दर्शनकी आकांक्षासे केवल जल पीकर ही रहे॥ २३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.5.23 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 31) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/5/23/