तदनन्तर राजा अम्बरीषने अपने ही समान भक्त पुत्रोंपर राज्यका भार छोड़ दिया और स्वयं वे वनमें चले गये। वहाँ वे बड़ी धीरताके साथ आत्मस्वरूप भगवान्में अपना मन लगाकर गुणोंके प्रवाहरूप संसारसे मुक्त हो गये॥ २६॥
अथाम्बरीषस्तनयेषु राज्यं
समानशीलेषु विसृज्य धीरः।
वनं विवेशात्मनि वासुदेवे
मनो दधद् ध्वस्तगुणप्रवाहः॥ २६
तदनन्तर राजा अम्बरीषने अपने ही समान भक्त पुत्रोंपर राज्यका भार छोड़ दिया और स्वयं वे वनमें चले गये। वहाँ वे बड़ी धीरताके साथ आत्मस्वरूप भगवान्में अपना मन लगाकर गुणोंके प्रवाहरूप संसारसे मुक्त हो गये॥ २६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.5.26 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 31) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/5/26/